निधि शर्मा, नई दिल्ली
कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव 2014 के अपने घोषणा पत्र में लोअर कास्ट के लोगों को कानून बनाकर प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण और प्राइवेट स्कूल के ऐडमिशन में कोटा देने का ऐलान करने वाली है। पार्टी का घोषणापत्र तैयार करने के काम में जुटे कांग्रेस के 2 नेताओं ने इकनॉमिक टाइम्स को यह जानकारी दी है।
कांग्रेस अपने घोषणापत्र में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के इनवेस्टमेंट या 1,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाली प्राइवेट कंपनियों में शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब (एससी और एसटी) के लोगों के लिए आरक्षण दिए जाने का वादा करेगी। वह प्राइवेट स्कूलों की पहली क्लास में ऐडमिशन के लिए रिजर्वेशन, मैट्रिक के बाद फ्री एजुकेशन और हर ग्रैजुएट को 25,000 रुपये का वाउचर देने की बात कहेगी।
मैनिफेस्टो में कांग्रेस के वाइस प्रेजिडेंट राहुल गांधी की छाप दिखेगी। उनके हालिया भाषणों से साफ हो गया था कि उनका जोर लोगों को अधिकार संपन्न बनाने पर है। घोषणापत्र की तैयारी अंतिम चरण में है और इसे अगले महीने जारी किया जा सकता है। यूपीए की तरफ से जनता को अधिकार संपन्न बनाने वाले कानूनों को पास कराने में राहुल गांधी और उनकी मां कांग्रेस प्रेजिडेंट सोनिया गांधी का बड़ा हाथ रहा है। यूपीए ने सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और भोजन का अधिकार देने वाले कानून बनाए। वैसे पिछले हफ्ते राहुल गांधी ने यह दिखा दिया कि उनके वादे लोक-लुभावन भी हो सकते हैं। उन्होंने एक साल में सब्सिडी वाले गैस सिलिंडर की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 किए जाने की मांग का खुलकर समर्थन किया।
कांग्रेस ने लंबे समय से पक्के वोट बैंक माने जाते रहे शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब को टारगेट करके बनाए गए प्लान को राज्यों के स्टेकहोल्डर्स, सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट्स, विधायकों और सांसदों के साथ सलाह-मशविरा करके अंतिम रूप दिया है। कांग्रेस को इस साल के लोकसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए वह बीएसपी और बीजेपी जैसी पार्टियों की तरफ खिंचे चले गए दलितों और शेड्यूल ट्राइब के अपने परंपरागत वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में जी जान से जुटी है। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस शेड्यूल कास्ट के लिए 91 आरक्षित सीटों में सिर्फ 6 जीत पाई। 2008 में उसने 38 सीटों पर जीत हासिल की थी।
कांग्रेस को लगता है कि शिक्षा, रोजगार और रहन-सहन का स्तर बेहतर बनाने के वादे से दलितों का दिल जीता जा सकता है। कांग्रेस अपनी इस कोशिश के तहत प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण का वादा कर सकती है। यह वादा उसने 2004 और 2009 के मैनिफेस्टो में भी किया था। कांग्रेस इस बार यह काम कानून के जरिए कराने का वादा करेगी। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा इनवेस्टमेंट या 1000 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही कंपनी को कुछ फीसदी एसी/एसटी के लोग लेने होंगे। आरक्षण का प्रतिशत कितना होगा इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।
कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव 2014 के अपने घोषणा पत्र में लोअर कास्ट के लोगों को कानून बनाकर प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण और प्राइवेट स्कूल के ऐडमिशन में कोटा देने का ऐलान करने वाली है। पार्टी का घोषणापत्र तैयार करने के काम में जुटे कांग्रेस के 2 नेताओं ने इकनॉमिक टाइम्स को यह जानकारी दी है।
कांग्रेस अपने घोषणापत्र में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के इनवेस्टमेंट या 1,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाली प्राइवेट कंपनियों में शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब (एससी और एसटी) के लोगों के लिए आरक्षण दिए जाने का वादा करेगी। वह प्राइवेट स्कूलों की पहली क्लास में ऐडमिशन के लिए रिजर्वेशन, मैट्रिक के बाद फ्री एजुकेशन और हर ग्रैजुएट को 25,000 रुपये का वाउचर देने की बात कहेगी।
मैनिफेस्टो में कांग्रेस के वाइस प्रेजिडेंट राहुल गांधी की छाप दिखेगी। उनके हालिया भाषणों से साफ हो गया था कि उनका जोर लोगों को अधिकार संपन्न बनाने पर है। घोषणापत्र की तैयारी अंतिम चरण में है और इसे अगले महीने जारी किया जा सकता है। यूपीए की तरफ से जनता को अधिकार संपन्न बनाने वाले कानूनों को पास कराने में राहुल गांधी और उनकी मां कांग्रेस प्रेजिडेंट सोनिया गांधी का बड़ा हाथ रहा है। यूपीए ने सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और भोजन का अधिकार देने वाले कानून बनाए। वैसे पिछले हफ्ते राहुल गांधी ने यह दिखा दिया कि उनके वादे लोक-लुभावन भी हो सकते हैं। उन्होंने एक साल में सब्सिडी वाले गैस सिलिंडर की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 किए जाने की मांग का खुलकर समर्थन किया।
कांग्रेस ने लंबे समय से पक्के वोट बैंक माने जाते रहे शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब को टारगेट करके बनाए गए प्लान को राज्यों के स्टेकहोल्डर्स, सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट्स, विधायकों और सांसदों के साथ सलाह-मशविरा करके अंतिम रूप दिया है। कांग्रेस को इस साल के लोकसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए वह बीएसपी और बीजेपी जैसी पार्टियों की तरफ खिंचे चले गए दलितों और शेड्यूल ट्राइब के अपने परंपरागत वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में जी जान से जुटी है। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस शेड्यूल कास्ट के लिए 91 आरक्षित सीटों में सिर्फ 6 जीत पाई। 2008 में उसने 38 सीटों पर जीत हासिल की थी।
कांग्रेस को लगता है कि शिक्षा, रोजगार और रहन-सहन का स्तर बेहतर बनाने के वादे से दलितों का दिल जीता जा सकता है। कांग्रेस अपनी इस कोशिश के तहत प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण का वादा कर सकती है। यह वादा उसने 2004 और 2009 के मैनिफेस्टो में भी किया था। कांग्रेस इस बार यह काम कानून के जरिए कराने का वादा करेगी। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा इनवेस्टमेंट या 1000 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही कंपनी को कुछ फीसदी एसी/एसटी के लोग लेने होंगे। आरक्षण का प्रतिशत कितना होगा इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।

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