नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने 15 लोगों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अपने फैसले में देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दया याचिका पर फैसले में देरी मत्युदंड को उम्रकैद में तब्दील करने का पर्याप्त आधार है। कोर्ट ने दया याचिका पर फैसला लेने में देरी के आधार पर चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की मौत की सजा को कम करके उम्रकैद में बदल दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दया याचिका खारिज होने के 14 दिनों के भीतर दोषी को फांसी की सजा हो जानी चाहिए। दया याचिका दायर करने वाले दोषियों के परिवारों को इसके खारिज होने की सूचना राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मृत्युदंड का सामना करने वाला कैदी यदि मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसे फांसी नहीं दी जा सकती और उसकी सजा कम कर के आजीवन कारावास में बदली जानी चाहिए। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने कहा कि मृत्युदंड का सामना करने वाले अपराधी और अन्य कैदियों को एकांत कारावास में रखना असंवैधानिक है।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 लोगों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अपने फैसले में देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दया याचिका पर फैसले में देरी मत्युदंड को उम्रकैद में तब्दील करने का पर्याप्त आधार है। कोर्ट ने दया याचिका पर फैसला लेने में देरी के आधार पर चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की मौत की सजा को कम करके उम्रकैद में बदल दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दया याचिका खारिज होने के 14 दिनों के भीतर दोषी को फांसी की सजा हो जानी चाहिए। दया याचिका दायर करने वाले दोषियों के परिवारों को इसके खारिज होने की सूचना राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मृत्युदंड का सामना करने वाला कैदी यदि मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसे फांसी नहीं दी जा सकती और उसकी सजा कम कर के आजीवन कारावास में बदली जानी चाहिए। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने कहा कि मृत्युदंड का सामना करने वाले अपराधी और अन्य कैदियों को एकांत कारावास में रखना असंवैधानिक है।

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