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Monday, 27 January 2014

सौभाग्य को रॉन्ग नंबर न लगा दे आपका मोबाइल नंबर

आनंद जौहरी,
आध्यात्मिक व ज्योतिषीय चिंतक

सफलता के लिए कठिन परिश्रम एक अनिवार्य शर्त है। पर साथ में सही दिशा में कार्य करना भी आवश्यक है। गलत दिशा में किए गए महान श्रम भी निरर्थक हो सकते हैं। सफलता के लिए सही होना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है कम से कम गलत होना।

आपके मोबाइल में जैसे आपका हैंडसेट, उसके फीचर्स, उसकी बैटरी आदि आपके जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं। उसी प्रकार आपका नंबर गुप्त रूप से सूक्ष्म रूप से आपकी सफलता पर असर डालता है। जहां एक गलत नंबर भले ही आपके सौभाग्य को दुर्भाग्य में न बदल पाए पर उससे हमारा श्रम अवश्य प्रभावित हो सकता है या हमें ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। वहीं, उचित नंबर मानसिक श्रम में वृद्धि कर हमें अनुकूल परिणाम प्रदान करता है, जिससे हम सफलता की ओर दिनोंदिन बढ़ते चले जाते हैं। एक अनुकूल फोन नंबर हमें मनोवैज्ञानिक या मानसिक रूप से सशक्त बनाता है और हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

मोबाइल नंबर के चुनाव में ऊर्जा, शक्ति, संपर्क, अनुकूलता इत्यादि को परखा जाता है। अंक 1, 3,6 और 9 इस विचार से ज्यादा प्रभावशाली सिद्ध होते हुए प्रतीत होते हैं। 6 को छोड़कर सभी विषम संख्याएं हैं और 6 का संबंध भी विषम संख्याओं से अधिक है। नंबर के उचित चयन के लिए विशेषज्ञ की सहायता अवश्य लें। आइए जानें, आपके मूलांक के लिए फोन और मोबाइल नंबर कैसा हो और...
मूलांक 1 (जन्म तारीखः 1, 10, 19, 28) 
घर, ऑफिस या मोबाइल नंबर लेते समय ध्यान रखें कि उस नंबर में 1 नंबर कई बार आना चाहिए। नंबर का अंत 1 से हो तो अच्छा है। आपके नंबर का योग 1 हो तो यह आपके लिए सौभाग्यशाली रहेगा। 8 के योग का नंबर आप इस्तेमाल न करें। यह आपके लिए शुभ नहीं है। अगर नंबर का योग 1 संभव नहीं है तो आप 3 या 5 नंबर पर भी विचार कर सकते हैं।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग अगर लाल या धातु का रंग (जैसे-स्टील बॉडी, सिल्वर, गोल्डन या कॉपर) तो यह आपके लिए सौभाग्यकारी है। मोबाइल का कवर यथासंभव लाल रंग का रखें। अगर संभव हो तो मोबाइल के वॉलपेपर या स्क्रीनसेवर में कोई हंसता या मुस्कुराता हुआ चेहरा रखें। लाल गुलाब, उगता हुआ सूरज और मुस्कुराते हुए बच्चे का चित्र आपके लिए अनुकूल है।

अनुकूल रिंग टोनः गंभीर व ऊर्जावान धुन या गीत,सेक्सोफोन, सितार।

मूलांक 2 (जन्म तारीखः 2, 11, 20, 29) 
आपके घर या ऑफिस के नंबर में 2 अंक की पुनरावृत्ति आपके लिए शुभ रहेगी। यानि उस नंबर में 2 का अंक एक से अधिक बार आना चाहिए। नंबर का योग 1 आपके लिए शुभ है। ध्यान रखें कि नंबर के अंत में 1 नंबर जरूर हो। मोबाइल नंबर लेते समय उसका योग 6 रखें और उसमें 7 की पुनरावृत्ति सौभाग्यकारी है। यानी 7 या 77 या 777 होना चाहिए। विशेष सलाह पर आप मोबाइल नंबर का योग 7 भी कर सकते हैं।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल या टेलिफोन का रंग यदि सिल्वर हो तो यह सौभाग्यकारक रहेगा। मोबाइल का कवर पारदर्शी रखें। सक्रीन सेवर पर पूर्णिमा का चंद्रमा, सुंदर स्त्री या जलती हुई मोमबत्ती या दीपक का चित्र आपके फोन पर होने वाले संपर्कों को लाभकारी बनाएगा।

अनुकूल रिंग टोनः मध्यम गति या तारों पर बजने वाला संगीत और पुराने मधुर गीत। गिटार, सारंगी।

मूलांक 3 (जन्म तारीखः 3, 12, 21, 30)
आपके घर या ऑफिस के फोन का योग 1 या 3 होना चाहिए और उसमें 3 अंक की पुनरावृत्ति होनी चाहिए पर नंबर के अंत में 9, 99 या 999 आना शुभ रहेगा। मोबाइल के नंबर का योग 6 रखें और उसमें 6 और 9 अधिक से अधिक रखने का प्रयास करें। मोबाइल नंबर के आखिर में भी 9, 99 या 999 शुभ रहेगा। विशेष परिस्थितियों में मोबाइल नंबर का योग 9 भी अच्छा फल प्रदान कर सकता है। 2, 4 या 8 का योग हानिकारक हो सकता है।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग पूर्ण या आंशिक रूप से गोल्डन, ऑरेंज या पीला हो तो अति शुभ है। मोबाइल का कवर गोल्डन या पीले रंग का इस्तेमाल करें। स्क्रीन सेवर और वॉलपेपर सूरजमुखी का फूल, उगता हुआ सूरज, ईश्वर या संत-महात्मा का चित्र इस्तेमाल करें। अच्छे संपर्क बनेंगे।

अनुकूल रिंग टोनः तेज गति, स्फूर्ति वाला संगीत और प्रेरणा देने वाला गीत। भक्ति गीत, तबला, ड्रम, धुंघरु या ढोल।

मूलांक 4 (जन्म तारीखः 4, 13, 22, 31)
आपको अपने घर या कार्यालय के नंबर का योग 5 या 6 रखना चाहिए। यदि उसमें 1 नंबर की पुनरावृत्ति हो रही हो तो बहुत अच्छा है। नंबर के अंत में 1 या 5 का आना सौभाग्यकारी रहेगा। मोबाइल के नंबर का योग या 5 रखना शुभकारी होगा। अगर इसमें 1 अंक की पुनरावृत्ति हो और आखिर में 1 या शून्य(0) आए तो यह आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग ग्रे, सफएद या सिल्वर आपके लिए शुभ है। मोबाइल का कवर हरे या नीले रंग का हो तो अति उत्तम रहेगा। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर में कोई धार्मिक चिन्ह जैसे स्वास्तिक, ऊं, 786 या किसी यंत्र की तस्वीर लगा सकते हैं। विशेष सफलता के लिए अपने गुरु, मार्गदर्शक, परम मित्र की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं।

अनुकूल रिंग टोनः पियानो या तरंगों वाला धीमा संगीत व मधुर, शांत, धीमा गीत। वायलिन, बांसुरी।

मूलांक 5 (जन्म तारीखः 5, 14, 23)
आपको अपने घर और कार्यालय के नंबर का योग 5 रखने का प्रयास करना चाहिए। यदि इसमें 1 नंबर की पुनरावृत्ति हो और इसके अंत में 5, 55, 555 या 15 हो तो यह बहुत शुभकारी होगा। आपके मोबाइल नंबर का योग अगर 1 हो तो यह भाग्य जगाने में सहायक होगा। इसमें 5 अंक की पुनरावृत्ति और अंत में 1, 11, 111 या 15 आपके लिए सफलता प्रदायक सिद्ध होगा। 2 का अंक हानिकारक हो सकता है।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग क्रीम और पीला छोड़कर कोई भी हो उत्तम होगा। पर, मोबाइल का कवर हरा या लाल शुभ है। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर पर फलों, पेड़-पौधे, जंगल के दृश्य का हरे रंग का कोई शुभ चिन्ह सौभाग्यकारी है।

अनुकूल रिंग टोनः धीमी और मध्यम गति पर ऊर्जावान संगीत व अर्थपूर्ण गीत। बांसुरी, तबला, सितार।

मूलांक 6 (जन्म तारीखः 6, 15, 24)
आपके घर, ऑफिस और मोबाइल के नंबर्स का योग 6 हो तो यह अति शुभ है। इसमें 9 नंबर की पुनरावृत्ति आपको सफल बनाएगी। इसका अंत 1 या 9 से होना चाहिए। अंत में 9 अंक की पुनरावृत्ति शुभ रहेगी जैसे 99, 999, 9999।

रंग और वॉलपेपरः वॉलपेपर या स्क्रीन सेवर पर आपके परिजन, प्रिय मित्र, माता-पिता, सुंदर स्त्री और बच्चों का चित्र आपको सफलता प्रदान करेगा। आपके मोबाइल नंबर का रंग सफेद और सिल्वर सौभाग्यकारक है। सिल्वर या पारदर्शी मोबाइल कवर उत्तम है।

अनुकूल रिंग टोनः मिलाजुला संगीत, मधुर नए-पुराने गीत, गिटार।

मूलांक 7 (जन्म तारीखः 7, 16, 25)
आपके घर और कार्यालय के फोन नंबर्स का योग 1 या 2 श्रेष्ठ है। इसमें 2 नंबर की अधिक पुनरावृत्ति आपको सौभाग्य प्रदान करेगी। इसके अंत में 7 अंक की पुनरावृत्ति जैसे 77, 777, 7777 आपके सौभाग्य का द्वार खोल सकती है। आपके मोबाइल नंबर का योग 2, 7 या 9 उत्तम है। नंबर में 7 नंबर की पुनरावृत्ति शुभकारक है। अंत में 7 या 9 नंबर की पुनरावृत्ति कल्याणकारी रहेगी। जैसे 77, 777, 7777 या 99, 999, 9999।

रंग और वॉलपेपरः वॉलपेपर या स्क्रीन सेवर पर सफेद पक्षियों, सुंदर स्त्रियों और सफेद स्वास्तिक का चित्र शुभ संकेत रहेगा। मोबाइल का रंग हरा छोड़कर सभी रंग शुभ हैं। क्रीम, सिल्वर रंग विशेष रूप से उत्तम फल प्रदान करेंगे। मोबाइल का कवर पारदर्शी रखें।

अनुकूल रिंग टोनः थिरकने वाले गीत, पुराने गीत, बांसुरी की धुन, सेक्सोफोन।

मूलांक 8 (जन्म तारीखः 8, 17, 26)
आपके घर और कार्यलाय के नंबर का योग 2 शुभ है। इसमें 8 अंक की पुनरावृत्ति उत्तम रहेगी। नंबर के अंत में 5 का अंक अच्छा रहेगा। आपके मोबाइल नंबर का योग 6 आपको सफलता प्रदान करेगा। इसमें 6 अंक की आवृत्ति अधिक होने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। मोबाइल नंबर के अंत में 0 या 6 अंक शुभ है।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग काला, ग्रे या भूरा श्रेष्ठ है। कवर का रंग भी यदि सिल्वर, काला, ग्रे या भूरा हो तो बेहतर रहेगा। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर पर शुभ धार्मिक चिन्ह, अपने इष्टदेव या गुरु का चित्र लगाना सौभाग्यकारी होगा।

अनुकूल रिंग टोनः आध्यात्मिक व धार्मिक गीत, शांत, धीमा व सुरीला संगीत, बांसुरी की धुन, बीन या संतूर।

मूलांक 9 (जन्म तारीखः 9, 18, 27)
आपके घर व कार्यालय के फोन नंबर का योग 3 या 6 होना चाहिए। नंबर में 3 की पुनरावृत्ति होनी चाहिए और अंत में 9, 99, 999, 9999 वाला नंबर लेने का प्रयास करना चाहिए, सौभाग्यकारी रहेगा। मोबाइल के नंबरों का योग 9 या 6 शुभ है। मोबाइल नंबर के मध्य में 6 या 9 की पुनरावृत्ति शुभ है। जैसे 696969। नंबर 69 आपके भाग्य में वृद्धि करेगा।

रंग और वॉलपेपरः मोबाइल का रंग यथासंभव लाल, मरून, कॉपर, गोल्डन रखने का प्रयास करना चाहिए। मोबाइल कवर कॉपर, गोल्डन या क्रीम रंग का रखना शुभ है। वॉलपेपर पर प्रसिद्ध इमारतें जैसे ताजमहल और पूर्ण चंद्रमा का चित्र, प्राचीन धरोहरें, राजसी कलाकृतियां, पानी पीते हुए पक्षियों का चित्र तथा मशीनों के चित्र शुभकारी हैं।

अनुकूल रिंग टोनः जोश व ऊर्जावाले गीत, रिदम व थाप वाला संगीत। ढोल, नगाड़ा, ड्रम, तबला।

दुनिया की सबसे लंबी महिला का एम्स में ऑपरेशन

नई दिल्ली
अपनी बढ़ती लंबाई और सिर, हाथ, पैर, नाक वगैरह के बढ़ते साइज की वजह से शबीना (बदला हुआ नाम) दस साल से घर में कैद थी। दुनिया के तानों और बच्चों की हंसी की पात्र बन चुकी शबीना यूं तो अपने 7 फीट 8 इंच लंबे कद की वजह से अपना नाम गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज करा चुकी हैं। लेकिन, 15 साल की उम्र से जायगेनटिज्म विद ब्रेन ट्यूमर की बीमारी की शिकार शबीना को शुरू में इलाज नहीं मिला। लगातार उसकी बॉडी और बॉडी पार्ट्स का साइज बढ़ता गया।

दो बेड जोड़कर एम्स ने बनाया एक बेड: फिलहाल एम्स में भर्ती शबीना का ट्यूमर निकालने में डॉक्टरों को कामयाबी मिल चुकी है। उसकी सर्जरी करने वाले डॉक्टरों की टीम के लिए शबीना का केस इतना बड़ा चैलेंज था कि न केवल सर्जरी के लिए स्पेशल तैयारी करनी पड़ी, बल्कि ऑपरेशन थिअटर में उसके लिए दो बेड को जोड़कर स्पेशल बेड बनाया गया। थाई साइज के बीपी मशीन से उसकी जांच की गई। यही नहीं, सर्जरी के दौरान इंडोस्कोपी मशीन में 18 सेमी की जगह 30 सेमी की पाइप लगाई गई। डॉक्टरों का कहना है कि बेहिसाब लंबाई बढ़ना एक बीमारी है। शुरू में ही लोगों को इस पर ध्यान रखना चाहिए।
15 साल की उम्र से डिवेलप होने लगा ट्यूमरः इंडोक्रोनॉलजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर निखिल ने बताया कि एक एनजीओ की मदद से शबीना को एम्स लाया गया। 7 फीट 8 इंच लंबी और 130 किलोग्राम की यह मरीज अंदर से काफी कमजोर थी। सालों से बेड पर पड़े होने की वजह से उसकी हड्डियां काफी कमजोर हो चुकी थीं। जब उसकी उम्र 15 साल थी, तभी से उसके ब्रेन में ट्यूमर डिवेलप होने लगा था, इस ट्यूमर को पिट्यूटरी एडेनोमा ग्रोथ हॉर्मोन भी कहते हैं। ट्यूमर बढ़ने से यह हॉर्मोन एक्टिव हो जाता है और बॉडी के पार्ट्स और पूरी बॉडी साइज बढ़ने लगती है। हॉर्मोन सामान्यत: 5 माइक्रो इंटरनैशनल यूनिट प्रति डेसी लीटर (mIu/dl) होता है।

लेकिन इस पेशंट में यह 80 था, जो सर्जरी के बाद अब केवल 15 रह गया है। अब आगे अगर हॉर्मोन का कुछ हिस्सा बच जाता है, तो इसे गामा नाइफ की मदद से खत्म किया जाएगा। चूंकि पीड़िता वर्षों से इस बीमारी की शिकार है, इससे उसकी बॉडी साइज के साथ-साथ इंटरनल अंग जैसे- हार्ट और बाकी पार्ट्स के साइज भी नॉर्मल से ज्यादा पाए गए। उन्होंने बताया कि ट्यूमर धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था और अब इसका असर उसकी आंखों की रोशनी पर भी पड़ सकता था। आमतौर पर ऐसे केस कम आते हैं, लेकिन इस मामले में ट्यूमर का साइज चार सेमी तक हो गया था, जो कभी भी हैमरेज हो सकता था।

आसान नहीं थी इस खास पेशंट की सर्जरी: न्यूरो सर्जन डॉक्टर आशीष सूरी ने बताया कि पीड़िता की सर्जरी 16 जनवरी को की गई। इंडोस्कोपी स्कल बेस्ड सर्जरी की गई। सबसे पहले नॉर्मल इंडोस्कोपी की जगह सबसे बड़े 30 सेमी की पाइप लगाई गई और इसे हाईटेक कंप्यूटर बेस्ड न्यूरो नेविगेशन सिस्टम से जोड़ दिया गया, जिसे स्क्रिन पर भी देखा जा सकता था। सबसे पहले नाक की एक छेद से एक इंडोस्कोपी की एंट्री कराई गई और जहां पर यह खत्म हुआ, वहां 10 एमएल का होल बनाया गया। फिर नाक की दूसरी छेद से दूसरी इंडोस्कोपी को अंदर डाला गया और उसके आखिरी छोर पर एक होल बनाया गया और फिर दोनों होल को मिलाकर एक बड़ा होल बनाया गया।

डॉक्टर ने बताया कि ब्रेन स्कल के सेंट्रल में सेला का स्ट्रक्चर होता है और ब्रेन को बचाने के लिए डूरा को ड्रील से काटकर ट्यूमर निकाला गया। उन्होंने कहा कि अगर ट्यूमर नहीं निकाला जाता, तो इसकी वजह से आंखों की नस पर दबाव बढ़ता और आंखों की रोशनी जाने की आशंका थी। मरीज अब पहले से बेहतर है। कुछ दिनों में उसे आईसीयू से बाहर शिफ्ट किया जाएगा।

डॉक्टरों के सामने क्या थे चैलेंज?
- बॉडी पार्ट्स की साइज ज्यादा होने से अलग से स्पेशल इंस्ट्रूमेंट यूज करने पड़े।

- बीपी जांच के लिए बांह की जगह थाई के साइज की मशीन लगाई गई।

- इंडोस्कोपी में आमतौर पर 18 सेमी की पाइप यूज होती है, यहां 30 सेमी की पाइप लगाई गई।

- ऑपरेशन थियेटर में 6 फीट से बड़ा बेड नहीं था, इसलिए दो बेड आपस में जोड़े गए।

- एनेस्थीसिया टीम के लिए भी यह चैलेंजिंग था, दोबारा एनेस्थीसिया देना पड़ा।

- मरीज का ट्यूमर चार सेमी साइज का था, जो कभी भी फट सकता था।

- ट्यूमर और बढ़ता तो पेशंट की आंख की रोशनी जा सकती थी।

2002 दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार: राहुल

नई दिल्ली
देश में काफी राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। सत्ता संघर्ष अपने चरम पर है और पार्टियों में 'बयानों का घमासान' चल रहा है। कई ओपिनियन पोल्स में कांग्रेस की हालत खराब नजर आई है। मौजूदा माहौल को देखते हुए कांग्रेस ने अपने 'युवराज' राहुल गांधी को पीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया है। अलबत्ता उन्हें प्रचार की कमान सौंप कर फ्रंट फुट लीडर के रूप में पेश करने की कोशिश जरूर की गई है। खुद राहुल का कहना है कि अर्जुन की तरह उनकी नजर 'सिस्टम' को बदलने पर है। आजादी के बाद देश में सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेसी सरकारों की 'ऐतिहासिक भूलों' से लेकर मौजूदा 'पॉलिटिकल सिनेरिओ' पर राहुल ने टाइम्स नॉउ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी से अपने पहले टीवी इंटरव्यू में खुलकर बात की। पेश हैं, इस खास इंटरव्यू के चुनिंदा अंश:-

अरनब: राहुल, आपका बहुत धन्यवाद। सांसद के तौर पर आपको 10 साल हो गए हैं, आपने पहला चुनाव 2004 में लड़ा था और यह आपका पहला इंटरव्यू है।

राहुल: यह मेरा पहला इंटरव्यू नहीं है, हां इस तरह अनौपचारिक तौर पर पहली बार इंटरव्यू दे रहा हूं।
अरनब: इतनी देर क्यों लग गई।

राहुल : मैंने इससे पहले भी थोड़ा मीडिया इंटरेक्शन किया है, प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं और बातचीत भी की है। लेकिन मेरा जोर खासतौर पर पार्टी के अंदरूनी काम पर रहा है और इसी काम में मेरी ज्यादा एनर्जी लगी।

अरनब: या फिर आप सीधे किसी के साथ बातचीत करने से हिचकते रहे हैं।

राहुल: बिल्कुल नहीं। मैंने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं, ऐसी कोई बात नहीं है।

अरनब: या फिर ऐसा तो नहीं है कि आप कठिन मुद्दों पर बात करने से हिचक रहे थे?

राहुल: मुझे कठिन मुद्दे अच्छे लगते हैं, मैं उनका सामना करना चाहता हूं।

अरनब: राहुल गांधी, पहला पॉइंट तो यह है कि आप प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के सवाल को टालते रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि राहुल कठिन मुकाबले से डरते हैं?

राहुल: आप अगर कुछ दिन पहले की एआईसीसीसी में मेरी स्पीच को सुनें, तो साफ मुद्दा है कि इस देश में प्रधानमंत्री किस तरह चुना जाता है। यह चयन सांसदों के जरिए होता है। हमारे सिस्टम में सांसद चुने जाते हैं और वे प्रधानमंत्री चुनते हैं। एआईसीसी की स्पीच में मैंने साफ कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी मुझे किसी भी जिम्मेदारी के लिए चुनती है तो मैं तैयार हूं। यह इस प्रक्रिया का सम्मान है। चुनाव से पहले ही पीएम उम्मीदवार का ऐलान का मतलब है कि आप सांसदों से पूछे बिना ही अपने प्रधानमंत्री को चुन रहे हैं, और हमारा संविधान ऐसा नहीं कहता।

अरनब: लेकिन आपने पीएम उम्मीदवार का ऐलान 2009 में किया था।

राहुल: हमारे पास सरकार चला रहे पीएम थे और उन्हें बदलने का सवाल ही नहीं था।

अरनब: क्या आप नरेंद्र मोदी का सीधा आमना सामना करने से बच रहे हैं। क्या यह डर है कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव बेहतर नहीं लग रहा है और राहुल गांधी को हार का डर है? साथ ही यह सोच भी कि राहुल गांधी चुनौती के हिसाब से तैयार नहीं हो पाए हैं और हार का डर है। इसलिए वह नरेंद्र मोदी के साथ सीधे टकराव से बच रहे हैं? आपको इसका जवाब देना चाहिए।

राहुल: इस सवाल को समझने के लिए आपको यह भी समझना होगा कि राहुल गांधी कौन है और राहुल गांधी के हालात क्या रहे हैं और अगर आप इस बात को समझ पाते हैं तो आपको जवाब मिल जाएगा कि राहुल गांधी को किस बात से डर लगता है और किस बात से नहीं लगता। असली सवाल यह है कि मैं यहां क्यों बैठा हूं? आप एक पत्रकार हो, जब आप छोटे रहे होगे तो आपने सोचा होगा कि मैं कुछ करना चाहता हूं, किसी एक पॉइंट पर आपने जर्नलिस्ट बनने का फैसला किया होगा, आपने ऐसा क्यों किया?

अरनब: इसलिए, क्योंकि मुझे पत्रकार होना अच्छा लगता है। यह मेरे लिए एक प्रफेशनल चैलेंज है। मेरा सवाल है कि आप नरेंद्र मोदी से सीधा आमना-सामना करने से क्यों बच रहे हैं?

राहुल: मैं इसी सवाल का जवाब देने जा रहा हूं, लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि जब आप छोटे थे और पत्रकार बनने का फैसला किया तो क्या वजह थी?

अरनब: जब मैंने पत्रकार बनने का फैसला किया तो मैं आधा पत्रकार नहीं बन सकता था। जब एक बार आपने राजनीति में आने का फैसला कर लिया और पार्टी को आप नेतृत्व भी दे रहे हैं तो आप यह आधे मन से नहीं कर सकते हैं। अब मैं आपसे वही सवाल वापस पूछता हूं, नरेंद्र मोदी तो आपको रोज चैलेंज कर रहे हैं?

राहुल: आप मेरे सवाल का सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं। लेकिन मैं आपको जवाब देता हूं, जिससे आपको मेरे सोचने के बारे में कुछ झलक मिल पाएगी। जैसे अर्जुन के बारे में कहा जाता है कि उन्हें सिर्फ अपना निशाना दिखाई देता था। आपने मुझसे नरेंद्र मोदी के बारे में पूछा, आप मुझसे कुछ और भी पूछ लो। लेकिन मुझे जो बस एक चीज दिखाई देती है वह यह कि इस देश का सिस्टम बदलना चाहिए। मुझे कुछ और नहीं दिखाई देता, मैं और कुछ नहीं देख सकता। मैं बाकी चीजों के लिए अंधा हूं, क्योंकि मैं अपनों को सिस्टम से तबाह होते हुए देखा है, क्योंकि सिस्टम हमारे लोगों के लिए भेदभाव करता है। मैं आपसे पूछता हूं, आप असम से हैं और मुझे यकीन है कि आप भी अपने कामकाज में सिस्टम का यह भेदभाव महसूस करते होंगे। सिस्टम रोज रोज लोगों को दुख देता है और मैंने इसे महसूस किया है। यह दर्द मैंने अपने पिता के साथ महसूस किया, उन्हें रोज इससे टकराते हुए देखा। इसलिए यह सवाल कि क्या मुझे चुनाव हारने से डर लगता है या मैं नरेंद्र मोदी से डरता हूं, कोई पॉइंट ही नहीं है। मैं यहां एक चीज के लिए हूं, हमारे देश में बहुत ज्यादा ऊर्जा है, किसी भी देश से ज्यादा, हमारे पास अरबों से युवा हैं और यह ऊर्जा फंसी है।

अरनब: मैं आपका ध्यान फिर से अपने सवाल की तरफ लाता हूं। जो आप कह रहे हैं वह मैं समझता हूं। लेकिन सीधे तौर पर लेते हैं, नरेंद्र मोदी आपको शहजादा कहते हैं, इस बारे में आपकी क्या राय है? क्या आपको मोदी से हारने का डर है? राहुल इसका प्लीज सीधा जवाब दीजिए।

राहुल: देश के लाखों युवा यहां के सिस्टम में बदलाव लाना चाहते हैं, राहुल गांधी ये चाहता है कि देश की महिलाओं का सशक्तिकरण हो। हम सुपर पावर बनने की बात करते हैं...

अरनब: मेरा सवाल है कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष का बीजेपी के पीएम कैंडिडेट पर क्या नजरिया है।

राहुल: मुझे लगता है कि हम बीजेपी को अगले चुनाव में हरा देंगे।

अरनब: आपके प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हैं कि उनके दौर में अहमदाबाद की सड़कों पर मासूमों का नरसंहार हुआ। इस पर आपका क्या नजरिया है? क्या आप इससे सहमत हैं।

राहुल: प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं, वह एक तथ्य है। गुजरात में दंगे हुए और लोग मारे गए। लेकिन असली सवाल है...

अरनब: लेकिन मोदी कैसे जिम्मेदार?

राहुल: जब वह सीएम थे, तब दंगे हुए।

अरनब: लेकिन मोदी को क्लीन चिट मिल चुकी है। क्या ऐसे में कांग्रेस उन पर हमले जारी रख सकती है?

राहुल: कांग्रेस और बीजेपी अलग सोच पर काम करती है। हमारा बीजेपी पर हमला इस पर आधारित है कि देश को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। इसमें गांवों का, महिलाओं का युवाओं का सशक्तिकरण जरूरी है।

अरनब: लेकिन नरेंद्र मोदी दंगों के लिए कैसे जिम्मेदार हैं, जब उन्हें दंगों के लिए क्लीनचिट मिल चुकी है?

राहुल: हमारी पार्टी विचारधारा के आधार पर बीजेपी पर हमले कर रही है। हमारी पार्टी का मानना है कि महिलाएं सशक्त हों, लोकतंत्र हर घर तक पहुंचे। बीजेपी की सोच है कि ताकत केंद्रित रहे और कुछ लोग देश को चलाएं।

अरनब: लेकिन नरेंद्र मोदी 2002 के दंगों के लिए कैसे जिम्मेदार हैं, जब उन्हें कोर्ट और एसआईटी से क्लीनचिट मिल चुकी है। इसलिए राहुल जी आप नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों पर निजी तौर पर कैसे घसीट सकते हैं? आपको नहीं लगता कि कांग्रेस की यह रणनीति मूलभूत तौर पर गलत है?

राहुल: हमारी पार्टी की रणनीति साफ है। हमने जो कुछ पिछले पांच-दस सालों में किया है और जैसे लोगों को अधिकार दिए हैं, उसको आप आजादी के आंदोलन से अब तक जोड़ सकते हैं। हमने किसानों को हरित क्रांति दी। लोगों को टेलिकॉम क्रांति दी। सूचना का अधिकार दिया। जो चीजें बंद होती थीं, जिनके बारे में कोई नहीं जानता था। उनके बारे में अब लोग जान सकते हैं।

अरनब: लेकिन आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया? गुजरात दंगों पर आपकी पार्टी मोदी को घेरती रही है। और वह कहते हैं कि मुझे कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है। मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कि कोर्ट से क्लीन चिट के बाद क्या दंगों पर मोदी को घेरने की रणनीति गलत है?

राहुल: प्रधानमंत्री ने दंगों पर अपनी स्थिति रखी है। गुजरात में दंगे हुए। लोग मरे। मोदी उस समय राज्य के मुखिया थे। अब असली विचारधारा की लड़ाई यह है और जिसे हम जीतने जा रहे हैं, वह लोगों के सशक्तिकरण की बात है। गुजरात दंगों पर आपका नजरिया अपनी जगह पर है और यह भी जरूरी है कि जो इनके कसूरवार हैं, उन्हें सजा मिले। लेकिन असली सवाल देश की महिलाओं को ज्यादा अधिकार देने का है। हम अभी सुपरपावर बनने की बात करते हैं। लेकिन जब तक औरतों को हक नहीं मिलेगा, हम आधी सुपर पावर ही रहेंगे। मैं चाहता हूं कि देश के युवा पार्टी में लोकतंत्र को आगे बढ़ाएं। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर सबको साथ लेते हुए भारत निर्माण करें। मैं चाहता हूं कि हम भारत को दुनिया में मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाएं। कम से कम चीन की तरह।

अरनब: आप कहते हैं कि गुजरात दंगों के समय मोदी सत्ता में थे, यूपी में दंगों के दौरान अखिलेश रहे। और 1984 के दंगे के दौरान कांग्रेस सत्ता में थी। आपने अपने भाषण में दादी की मौत और उससे उपजे गुस्से का जिक्र किया था। और आपने कहा था कि गुस्से को काबू में रखकर उसे ताकत बनाना चाहिए। उसके बाद नरेंद्र मोदी ने आपकी खूब आलोचना की थी और कहा था कि वह अपनी दादी की मौत पर तो आंसू बहा रहे हैं, लेकिन क्या 1984 के दंगों में मारे गए लोगों के लिए आंसू बहाए? वह आपको बार-बार शहजादा कहते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी पार्टी के लोग 1984 के दंगों में शामिल थे? क्या आप इन दंगों के लिए माफी मांगेंगे जैसे कि मोदी से आप गुजरात दंगों के लिए माफी चाहते हैं?

राहुल: 1977 में हार के बाद हमें कई लोग छोड़कर चले गए। लेकिन सिख समुदाय हमारी दादी के साथ जुड़ा रहा। सिख इस देश के सबसे उद्यमी लोगों में से हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं। हमारे पीएम भी सिख हैं। मेरा अपने विरोधियों जैसा नजरिया नहीं है। जिन लोगों ने दादी की हत्या की वे दो लोग थे। मैं पीछे मुड़कर उस गुस्से को नहीं देखता हूं। वह मेरे लिए खत्म हो चुका है।

अरनब: तो फिर आप 84 के दंगों के लिए माफी क्यों नहीं मांगते? 2009 में तो जगदीश टाइटलर कांग्रेसी उम्मीदवार बनने जा रहे थे, जिनकी उम्मीदवारी को मीडिया में उठे विवाद के बाद वापस लेना पड़ा।

राहुल: 1984 के दंगों में मासूम लोग मारे गए थे और उनका मारा जाना बहुत भयानक था, जैसा नहीं होना चाहिए। 1984 और गुजरात दंगों में फर्क यह है कि गुजरात दंगों में सरकार शामिल थी।

अरनब: आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? उन्हें क्लीन चिट मिली है।

राहुल: 84 के दंगों के दौरान सरकार दंगे रोकने की कोशिश कर रही थी। मैं तब बच्चा था और मुझे याद है कि सरकार पूरी कोशिश कर रही थी। गुजरात में इसके उलट हुआ। सरकार दंगों को भड़का रही थी। इन दोनों में बहुत फर्क है। मासूम लोगों का मरना कतई सही नहीं है।

अरनब: आरटीआई करप्शन से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है। जैसा कि आपने एआईसीसी की स्पीच में कहा था। आपकी पार्टी के 2008 से 2012 के फंड का 90 फीसदी कैश से आया है। जिसमें से 89.11 फीसदी हिस्सा बेनामी स्रोतो से है। आप अपने घर से शुरुआत क्यों नहीं करते? क्यों कांग्रेस पार्टी के फंड को आरटीआई के तहत नहीं लाते?

राहुल: मुझे लगता है कि राजनीतिक दल अगर ऐसा मानते हैं तो उन्हें आरटीआई के तहत आना चाहिए। मेरा नजरिया है कि ज्यादा खुलापन हो तो अच्छा है। कानून संसद से बनता है। और राजनीतिक दलों को आरटीआई के तहत लाने के लिए ऐसा ही करना होगा। मेरा यह निजी नजरिया है। ...असली सवाल हमारे सिस्टम के अलग-अलग स्तंभों का है। अगर आप किसी एक को आरटीआई में लाते हैं और बाकियों को मसलन जुडिशरी और प्रेस इससे बाहर रहते हैं तो असंतुलन हो सकता है। मैं आरटीआई के दायरे में ज्यादा से ज्यादा चीजों को लाने के पक्ष में हूं और ऐसा करने से असंतुलन नहीं बनेगा।

अरनब: आपकी महाराष्ट्र सरकार ने आदर्श पर बने जुडिशल कमिशन की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। यह सब लोगों के सशक्तिकरण का हिस्सा तो नहीं था। अफसरों को दोषी ठहरा दिया गया, लेकिन नेता बचते दिखे। क्या आप अशोक चव्हाण को बचा रहे हैं?

राहुल: कांग्रेस पार्टी में जब भी भ्रष्टाचार का मामला आता है तो हम एक्शन लेते हैं। हम लोग ही आरटीआई लाए थे, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मैंने इस मामले में अपनी स्थिति साफ कर दी थी। कांग्रेस पार्टी में जो भी करप्शन का हिस्सा है, सजा दी जाएगी। मैं कहता हूं कि संसद में जो 6 विधेयक फंसे हैं, उन्हें पास किया जाए।

अरनब: लेकिन आपके बोल आपके काम से मेल नहीं खाते राहुल? अशोक चव्हाण की तरह सारे नेता बच जाते हैं। इस मामले में कई एनसीपी के मंत्री भी हैं। अपने फायदे के लिए इन्होंने करगिल के नाम तक का इस्तेमाल किया।

राहुल: मैंने अपनी स्थिति प्रेस के सामने साफ कर दी है। चाहे जो भी हो उस पर कार्रवाई जरूर होगी। हमने अपने मंत्रियों को भी सजा दी है।

अरनब : यह भी आरोप है कि आप बहुत अच्छे इंसान हैं। आप आलोचना से प्रभावित होते हैं। सुब्रमण्यम स्वामी आपकी डिग्री पर सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं कि कैंब्रिज में आपकी एमफिल डिग्री की कोई थीसिस ही नहीं है। किसी ने 110 लाख डॉलर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल को देकर आपका एडमशिन कराया। उन्होंने आपकी दोनों डिग्रियों पर सवाल उठाए हैं।

राहुल : क्या आप कैंब्रिज में थे?

अरनब : मैं ऑक्सफर्ड में था?

राहुल : लेकिन, आपने कैंब्रिज में भी कुछ वक्त बिताया।

अरनब : मैं कैंब्रिज में कुछ समय के लिए विजिटिंग फेलो था।

राहुल : क्रैंब्रिज में कहां?

अरनब : सिडनी ससेक्स कॉलेज...

राहुल : मैं कैंब्रिज में ट्रिनिटी में था। मैंने एक साल वहां गुजारा और मैंने वहीं एमफिल किया। आप मेरी डिग्री देखना चाहते हैं तो मैं दिखा सकता हूं।

अरनब : क्या आप सुब्रमण्यम स्वामी को डिग्री दिखाना चाहेंगे? क्या आप उन्हें चैलेंज करेंगे?

राहुल : उन्होंने शायद मेरी डिग्री देखी है। मैंने हलफनामे दाखिल किए हैं कि मेरे पास ये डिग्रियां हैं। अगर मैं झूठ बोल रहा हूं तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। इससे ज्यादा मैं क्या करूं? मैं क्यों उन्हें चैलेंज करूं। वह मेरे परिवार पर 40 साल से हमले कर रहे हैं। मैं क्यों उन्हें चुनौती दूं?

अरनब : क्या आप नरेंद्र मोदी के साथ बहस के लिए तैयार होंगे। अगर वह भी तैयार होते हैं? मैं आपसे सीधा सवाल पूछ रहा हूं। क्यों बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच सीधी बहस नहीं होनी चाहिए।

राहुल : मैं कांग्रेस पार्टी का ढांचा बनाकर यह बहस ही कर रहा हूं। बहस के लिए आप का स्वागत है। जहां तक मेरा सवाल है तो बहस शुरू हो चुकी है।

अरनब : मैं यह पूछ रहा हूं कि क्या आप तैयार हैं? ताकि मैं मोदी से पूछ सकूं कि वह भी तैयार हैं।

राहुल : आप बहस शुरू करो, लेकिन असली मुद्दा पार्टी मशीनरी है। और हम ही यह कर रहे हैं। हम 15 सीटों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उम्मीदवार चुनेंगे। राष्ट्रीय बहस शुरू हो चुकी है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी है, जो खुलेपन में विश्वास रखती है और दूसरी तरफ विपक्ष है जो सत्ता को केंद्रित रखता है। यह बहस शुरू हो चुकी है और इसी के बारे में सारा चुनाव है।

अरनब : मोदी कहते हैं कि आपको 60 साल दिए। हमें 60 महीने दो...

राहुल : मेरा जवाब है कि पिछले 10 साल में हमने देश को सबसे तेज आर्थिक तरक्की दी है। हमने किसी भी सरकार से ज्यादा खुला सिस्टम दिया है। हमने मनरेगा, आधार जैसी व्यवस्थाएं दी हैं। कांग्रेस की सरकार 60 साल से है, इसलिए हम इस रफ्तार से तरक्की कर रहे हैं।

अरनब : आम आदमी पार्टी पर आपकी क्या राय है? आपका नजरिया आम आदमी पार्टी की ओर क्यों बढ़ रहा था? अचानक ऐसा क्यों लगता है कि अब आप उनकी आलोचना कर रहे हैं? जब आपने ऐसा कहा था कि कुछ लोग गंजों को भी कंघी बेच देते हैं, तो क्या आप आम आदमी पार्टी की ओर इशारा कर रहे थे?

राहुल : कांग्रेस और मैंने युवाओं के बीच जो काम किया है। उससे पार्टी में नई पीढ़ी आएगी। उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया मजबूत होगी। आम आदमी पार्टी के बारे में मैंने यह कहा कि हम उससे कुछ सीख सकते हैं, किस तरह लोगों तक पहुंचा जाए, यह उनसे समझा जा सकता है। लेकिन कुछ ऐसी भी चीजें हैं, जो उनसे नहीं लेनी चाहिए। हमारे पास कांग्रेस की मजबूत बातें हैं और हम उन पर तीन-चार साल से काम कर रहे हैं। हमारी पार्टी की गहरी जड़ें उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं और बदलाव के नाम पर हम उन्हें खत्म नहीं कर सकते।

अरनब : पिछले दिनों चिदंबरम ने कहा कि आम आदमी पार्टी को समर्थन देना जरूरी नहीं था? क्या आप उससे सहमत हैं, क्या आपको लगता है कि आपने गलत किया। कृपया सच्चा जवाब दीजिए।

राहुल : जहां तक मेरा नजरिया है, आप ने दिल्ली में चुनाव जीता और मुझे लगता है कि हमें उनकी मदद करनी चाहिए। हमारी पार्टी को लगा कि उनको अपने को साबित करने का मौका दिया जाना चाहिए। अब हम देख सकते हैं कि वे क्या कर रहे हैं और उन्होंने अपने को किस हद तक साबित किया है।

अरनब : अरविंद केजरीवाल के बारे में आपकी क्या राय है?

राहुल : वह विपक्ष के कई नेताओं की तरह हैं। हमें बतौर कांग्रेस पार्टी तीन चीजें करनी हैं। पहला, हमें खुद को बदलना होगा, ज्यादा युवाओं को लाना होगा और उन्हें जगह देनी होगी। इसके अलावा हमें मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देना होगा। हमने नॉर्थ, साउथ, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर बनाए हैं और भारत को मैन्युफैक्चरिंग सुपर हाउस बनाना होगा।

अरनब : क्या आप आम आदमी पार्टी को एंटी कांग्रेस वोट बैंक काटने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं?

राहुल : आपका मतलब है कि क्या हम आप को लेकर आए हैं। मुझे लगता है कि आप कांग्रेस की ताकत को कम करके आंक रहे हैं। यह पार्टी अगर ऐसा चाहे तो भी असर नहीं करेगी। कांग्रेस बहुत पावरफुल सिस्टम है और हमें चुनावों में नए चेहरों को लाने की जरूरत है, जो हम करने जा रहे हैं और हम चुनाव जीतेंगे।

अरनब: क्या आप चुनाव जीतेंगे? अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी लेंगे?

राहुल: हां हम चुनाव जीतेंगे। अगर नहीं जीते तो पार्टी उपाध्यक्ष होने के नाते मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लूंगा।

केजरीवाल सरकार का एक महीनाः 18 वादे और हकीकत

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आज एक महीना पूरा कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने सरकार बनाने के लिए दिल्ली की जनता से 18 वादे किए थे। प्रशांत सोनी बता रहे हैं कि इन 30 दिनों में क्या है केजरीवाल के वादों की हकीकत :

1. दिल्ली सरकार का कोई भी विधायक, मंत्री या अफसर लाल बत्ती की गाड़ी नहीं लेगा, बड़े बंगले में नहीं रहेगा और अपने लिए सिक्यॉरिटी नहीं लेगा।
हकीकतः सरकार बनने के पहले ही दिन लाल बत्ती के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया गया। मंत्रियों, अफसरों की गाड़ियों पर अब लाल, नीली बत्तियां नजर नहीं आतीं। बंगला लेने से भी इनकार किया, लेकिन छोटा सरकारी फ्लैट लेने के लिए तैयार। सीएम ने सुरक्षा लेने से मना किया है, लेकिन इसके बावजूद एक सुरक्षाकर्मी हमेशा उनके साथ रहता है। उनकी किडनैपिंग का इंटेलिजेंस इनपुट आने के बाद से पुलिस ने उनकी सुरक्षा और बढ़ा दी है।

2. भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त जनलोकपाल बिल पास किया जाएगा। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के घोटालों की जांच की जाएगी।
हकीकतः
 जनलोकपाल बिल अभी तक पास नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि बिल तैयार है और अगले महीने रामलीला मैदान में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर उसे पास कराया जाएगा। उससे पहले इसे कैबिनेट मीटिंग में पास किया जाएगा। कांग्रेस-बीजेपी की पूर्व सरकारों के घोटालों की जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
3. दिल्ली में स्वराज कानून स्थापित किया जाएगा। अपने मोहल्ले, कॉलोनी और गलियों के बारे में फैसला लेने का अधिकार सीधे जनता को दिया जाएगा। दिल्ली में विधायक और पार्षद फंड बंद किया जाएगा। यह पैसा सीधे मोहल्ला सभाओं को दिया जाएगा, ताकि जनता तय करे कि सरकारी पैसा उनके इलाके में कहां और कैसे खर्च होगा।
हकीकत
: स्वराज कानून बनाने को लेकर काम चल रहा है। इसके लिए एक कमिटी बनाई गई है, जो इस बिल का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। जल्द ही इस ड्राफ्ट को जनता के सामने रखकर उस पर जनता की राय ली जाएगी और फिर जरूरी सुधार करने के बाद इसे पास किया जाएगा। मोहल्ला सभाओं का गठन अभी नहीं हुआ है। पार्षद और विधायक फंड को लेकर भी स्थिति अभी तक क्लियर नहीं है। विभिन्न इलाकों में विकास कार्य रुके हुए हैं।

4. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
हकीकत: पिछले हफ्ते सीएम और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने 5 पुलिसवालों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर रेल भवन पर धरना दिया था। माना जा रहा है कि इसके पीछे रणनीति दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और दिल्ली पुलिस को सरकार के अधीन लाने की ही थी, लेकिन इस प्रोटेस्ट से केजरीवाल सरकार को कोई खास सफलता हाथ नहीं लग पाई।

5. बिजली कंपनियों का ऑडिट कराया जाएगा। दिल्ली में बिजली के बिल आधे किए जाएंगे।
हकीकतबिजली कंपनियों के ऑडिट का आदेश दे दिया गया है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उपराज्यपाल और हाई कोर्ट भी इसके लिए ग्रीन सिग्नल दे चुके हैं। सब्सिडी के जरिए बिजली के दामों में 50 फीसदी की कटौती करने की घोषणा तो की गई है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को ही मिलेगा।

6. दिल्ली में तेज चल रहे बिजली के मीटरों की जांच कराई जाएगी।
हकीकतमीटरों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जिन इलाकों में मीटर तेज चलने या बिल ज्यादा या गलत आने की शिकायतें आएंगी, उन इलाकों में किसी थर्ड पार्टी यानी स्वतंत्र एजेंसी से 10,000 मीटरों की रैंडम जांच कराई जाएगी।

7. दिल्ली के हर घर को 700 लीटर साफ पानी प्रतिदिन मुफ्त दिया जाएगा।
हकीकत: 
जिन घरों में पानी के मीटर लगे हुए हैं, उन घरों में रोज 700 लीटर पानी मुफ्त देने की घोषणा सीएम कर चुके हैं, लेकिन 701 लीटर होते ही पूरे पानी का बिल भरना पड़ेगा। जिन घरों में मीटर नहीं लगे हैं, उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। सरकार ने किसी भी कंपनी का मीटर लगाने की छूट दे दी है।

8. दिल्ली की सभी अनधिकृत कॉलोनियों को एक साल के अंदर नियमित करके इनमें तुरंत सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
हकीकत: 
इस दिशा में अभी कोई खास काम नहीं हो पाया है। सरकार ने इस मसले को लेकर कुछ मीटिंग की हैं। अधिकारियों को ऐसी कॉलोनियों के नक्शे बनाने का काम तेज करने और जल्द से जल्द नक्शे पास कराने के लिए कहा गया है। हालांकि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने में केंद्र सरकार का भी सीधा हस्तक्षेप रहता है।

9. झुग्गीवासियों को जब तक पक्के मकान नहीं दिए जाते, उनकी झुग्गियों को तोड़ा नहीं जाएगा।
हकीकत: 
इधर सरकार का गठन हो रहा था, उधर रेलवे के अधिकारियों ने रातोंरात नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में रेलवे ट्रैक के किनारे बनी एक झुग्गी बस्ती तोड़ डाली। झुग्गी वालों को पहले से बनकर तैयार पक्के मकान अलॉट करने का काम भी अभी शुरू नहीं हुआ है। नए मकान बनाने की दिशा में भी अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

10. स्थायी और नियमित कार्यों में ठेकेदारी पर कर्मचारियों को रखने की प्रथा बंद करके सभी लोगों को नियमित किया जाएगा।
हकीकत: 
दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों के अलग-अलग ग्रुप रोज सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अभी तक उन्हें स्थायी करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। सिर्फ एक कमिटी बना दी गई है, जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।

11. वैट का सरलीकरण किया जाएगा। वैट की दरों की फिर से समीक्षा की जाएगी।
हकीकत: 
वैट की दरों की समीक्षा करने या उसका सरलीकरण करने की दिशा में अभी तक कोई ठोस पहल या घोषणा नहीं की गई है।

12. दिल्ली में किराना में एफडीआई नहीं आने दिया जाएगा।
हकीकत: 
पिछली सरकार ने किराना में एफडीआई की जो इजाजत दी थी, उसे वापस लेते हुए केजरीवाल ने पिछली सरकार के फैसले को पलट दिया है और घोषणा की है कि किराना में एफडीआई को नहीं लाने दिया जाएगा।

13. किसानों को वो सभी सुविधाएं और सब्सिडी दी जाएंगी, जो दूसरे राज्यों के किसानों को उपलब्ध हैं। ग्राम सभा की मंजूरी के बिना किसी भी गांव की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। लाल डोरा बढ़ाया जाएगा।
हकीकत: 
किसानों को सुविधाएं, सब्सिडी और गांवों के विकास के संबंध में केजरीवाल सरकार ने अभी तक कोई पहल नहीं की है।

14. सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर प्राइवेट स्कूलों से बेहतर किया जाएगा। 500 से ज्यादा नए सरकारी स्कूल खोले जाएंगे। प्राइवेट स्कूलों में डोनेशन सिस्टम बंद किया जाएगा और उनकी फीस तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा।
हकीकत: 
अभी तो सरकारी स्कूलों की हालत और वहां शिक्षा का स्तर जस का तस है। स्कूलों की खराब हालत का पता लगाने के लिए वॉलंटियरों से सर्वे जरूर कराया गया है, लेकिन कोई नया स्कूल खोलने की घोषणा भी अब तक नहीं की गई है। 200 नए स्कूलों के लिए जमीन देख ली गई है। प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने की कोशिश जरूर की गई है। नर्सरी ऐडमिशन से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग से हेल्पलाइन शुरू की गई है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

15. दिल्ली में नए सरकारी अस्पताल खोले जाएंगे और सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट अस्पतालों से भी बेहतर इलाज का प्रबंध किया जाएगा।
हकीकत: 
अस्पतालों की हालत भी जस की तस है। कुछ अस्पतालों में बस नया रंग रोगन कराया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने के मामले में अभी तक कोई सुधार देखने को नहीं मिला है। कोई नया अस्पताल खोलने की घोषणा भी नहीं की गई है।

16. दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल महिला सुरक्षा दल बनाया जाएगा। नई अदालतें खोली जाएंगी और नए जज नियुक्त किए जाएंगे, ताकि महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में 3 से 6 महीने में सख्त सजा हो।
हकीकत: 
महिला सुरक्षा दल का गठन अभी तक नहीं हो पाया है। इसके गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ एक कमिटी बनाई गई है। 48 नई अदालतों का गठन हुआ तो है, लेकिन उसमें दिल्ली सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं था। हाई कोर्ट के निर्देश पर नई अदालतें बनाई गई हैं।

17. दिल्ली में इतनी नई अदालतें खोली जाएंगी और इतने जजों की नियुक्ति की जाएगी कि कोई भी मामला 6 महीने से एक साल के अंदर निपटाया जा सके।
हकीकत: 
किसी मामले में फैसला कितने दिन में आ जाएगा, यह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। जहां तक नई अदालतें खोलने और नए जजों की नियुक्ति का सवाल है, तो उस दिशा में दिल्ली सरकार की तरफ से अभी तक कोई बड़ा फैसला नहीं किया गया है।

18. अन्य पार्टियां केंद्र सरकार से संबंधित मुद्दों पर आम आदमी पार्टी का साथ देंगी।
हकीकत: 
सरकार को समर्थन दे रही कांग्रेस हो या विपक्षी बीजेपी, केंद्र सरकार से जुड़े मसलों पर दोनों ही आप की सरकार का साथ नहीं दे रहीं। रेल भवन पर हुए धरने के दौरान भी यह साफ नजर आया।

Tuesday, 21 January 2014

पत्नी और बच्चों का गला रेता, सूइसाइड की कोशिश

नई दिल्ली 
ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के फर्श बाजार इलाके में एक व्यक्ति ने पत्नीऔर दो बच्चों का गला रेत दिया जिससे एक बच्चे की मौत होगई। इसके बाद उसने खुद भी जान देने की कोशिश की। उसनेहाथ की कलाई काटने के बाद अपनी गर्दन भी रेत ली। पुलिसका कहना है कि घटनास्थल से सूइसाइड नोट मिला है। 

मंगलवार तड़के परिजनों को खुदकुशी का एसएमएस मिला तोवे दौड़ते हुए उनके घर पहुंचे लेकिन दरवाजा अंदर से बंदथा। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजे को तोड़ा गया। अजय वर्मा(35) और उनकी पत्नी ऋतु (32) दोनों बच्चों के साथ खून सेलथपथ बेड पर पड़े मिले। पुलिस ने चारों को इलाज के लिए हेडगेवार हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉक्टरों नेउनके साल के बेटे को मृत घोषित कर दिया। उनकी 10 साल की बेटी की हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिसअधिकारियों का कहना है कि अजय और उनकी पत्नी का ट्रीटमेंट चल रहा है। 

पुलिस के मुताबिक अजय वर्मा पत्नी और दो बच्चों के साथ भोलानाथ नगर तेजाब मिल चौक के पास रेंट पररहते हैं। वह योग और एरोबिक्स सिखाते हैं। उनकी इनकम का यही सोर्स है। उनकी बेटी इलाके के एक पब्लिकस्कूल में चौथी और बेटा दूसरी क्लास में पढ़ता है। सोमवार देर रात उन्होंने पत्नी और दोनों बच्चों को दूध में नशेकी गोलियां मिलाकर पिला दीं। इससे तीनों गहरी नींद में सो गए। इसके बाद अजय ने दोनों बच्चों का चाकू सेगला रेतने के बाद पत्नी का गला चाकू से काट दिया। इसके बाद अजय ने कलाई काटने के बाद अपना गला भीरेत लिया।