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Friday, 28 February 2014

सही तरीके से ‘हैंडल’ नहीं किए जाने से गड़बड़ा गए अश्विनः मनिंदर

नई दिल्ली
भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का मानना है कि टीम प्रबंधन द्वारा सही तरीके से हैंडल नहीं किए जाने के कारण ऑफ स्पिनर आर. अश्विन का अंतरराष्ट्रीय कैरियर गड़बड़ा गया है और वह रक्षात्मक गेंदबाज बन गए हैं। कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे अश्विन एशिया कप में नए ऐक्शन के साथ गेंदबाजी करते नजर आए।

मनिंदर ने 'ईएसपीएन क्रिकइन्फो' से कहा, 'वह कई वैरिएशन आजमा रहे हैं। जब आप बहुत कुछ आजमाने की कोशिश करते हैं तो अपनी मौलिकता खो देते हैं और यही हो रहा है जिससे मैं चिंतित हूं।' उन्होंने कहा कि मेरी नजर में अश्विन मैच विनर हैं। वह टेस्ट, वनडे या टी20 मैच जिता सकता है लेकिन उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया। मुझे समझ में नहीं आता कि गेंदबाजी कोच, मुख्य कोच और कप्तान उसके साथ क्या कर रहे हैं। यदि मैं होता तो उसकी गेंदबाजी को इस तरह बिगड़ने नहीं देता कि उसे ऐक्शन बदलना पडे।

पिछले 80 साल में 100 टेस्ट विकेट सबसे तेजी से लेने वाले गेंदबाज अश्विन भारतीय टीम के दक्षिण अफ्रीका और न्यू जीलैंड दौरे पर फ्लॉप रहे। मनिंदर ने कहा कि किसी को उसे बताना चाहिए कि उसे भारतीय टीम में इसलिए रखा गया क्योंकि उसने आईपीएल जैसे 20 ओवरों के क्रिकेट में विकेट लेने की तत्परता दिखाई थी।

मनिंदर ने कहा कि उसके बाद आप टेस्ट टीम में आए और पिछले साल ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद मैने कहीं पढ़ा कि उसने कहा, 'मेरा काम रनगति रोकना है। उसे यह किसने कहा? कप्तान ने?' उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया। किसी को भारतीय टीम में इसलिए लिया गया क्योंकि उसमें विकेट लेने की ललक थी और वह 20 ओवरों के क्रिकेट में भी विकेट ले रहा था लेकिन टेस्ट क्रिकेट में जहां विकेट लेने की जरुरत है, उसमें वह रक्षात्मक गेंदबाज बन गया, कुछ तो गड़बड़ हुई है। कोई उसे गलत राय दे रहा है।'

पूर्व स्पिनर ने कहा कि अश्विन को अपने करियर को ढर्रे पर लाने के लिए अच्छे कोच की जरुरत है। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई को जागना होगा और गेंदबाजों के लिए अच्छे कोच का इंतजाम करना होगा। अश्विन ही नहीं जडेजा को भी मदद की जरुरत है। वह प्रतिभाशाली है लेकिन उसे मार्गदर्शन की जरुरत है

कांग्रेस ने बच्चे को बचाकर मां को मार दिया: नरेंद्र मोदी

गुलबर्ग
बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सीमांध्र को तुलना मां से करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने आंध्र प्रदेश विभाजन में सीमांध्र के साथ भेदभाव करके बच्चे को तो बचा लिया है, लेकिन मां को मार दिया है।

मोदी ने शुक्रवार को यहां एक रैली में कहा कि बीजेपी भी तेलंगाना गठन के पक्ष में थी, लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह से इस काम को अंजाम दिया है वह तरीका गलत है।

उन्होंने कहा जिस तरह कांग्रेस ने संयुक्त आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ व्यवहार किया है और जिस तरह से मैडम (सोनिया गांधी) ने राज्य का विभाजन किया है, उससे तेलुगु भावना आहत हुई है।

यह भी पढ़ें: 10 जनपथ में 10 नंबरी गांधी: नरेंद्र मोदी

मोदी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के लोगों को कांग्रेस रूपी बुरे डॉक्टर की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ा।

भारत की हार

बैट्समनस्टेटसRB4's6'sSRMatRAvg
कुशल परेराकॉट दिनेश कार्तिक बोल्ड आर. अश्विन64814279.012454524.77
लाहिरू थिरीमानेएलबीडब्ल्यू आर. अश्विन38554169.0959118326.89
कुमार संगकारा (W)कॉट आर. अश्विन बोल्ड मोहम्मद शमी10384121122.623651242239.19
महेला जयवर्द्धनेकॉट रोहित शर्मा बोल्ड रवींद्र जडेजा91210754081142332.36
दिनेश चंडीमलबोल्ड रवींद्र जडेजा0100077172825.41
एंजेलो मैथ्यूज (C)एलबीडब्ल्यू मोहम्मद शमी6180033.33116243025.58
सचित्रा सेनानायकेकॉट रोहित शर्मा बोल्ड मोहम्मद शमी12132092.312620212.62
Chathuranga de Silvaएलबीडब्ल्यू रवींद्र जडेजा912107521111
तिसारा परेरानॉट आउट11180061.116974813.85
अजांता मेंडिसनॉट आउट5210250661355.62
लसिथ मलिंगा
टारगेट: 50 ओवर में 265 रनकुल स्कोर: 265/8 (49.2)
अतिरिक्त: 8 ( नो बॉल-0, वाइड-1, लेग बाइ-7, बाइ- 0, पेनल्टी-0)रन रेट: 5.37
विकेट गिरे :
1/80 (लाहिरू थिरीमाने, 17.2 ov.), 2/134 (कुशल परेरा, 26.5 ov.), 3/148 (महेला जयवर्द्धने, 31.1 ov.), 4/148 (दिनेश चंडीमल, 31.2 ov.), 5/165 (एंजेलो मैथ्यूज, 36.2 ov.), 6/183 (सचित्रा सेनानायके, 39.0 ov.), 7/216 (Chathuranga de Silva, 43.1 ov.), 8/258 (कुमार संगकारा, 48.3 ov.)
बॉलिंग
 करियर
बोलरOMRWNBWBE/RMatWAvg
भुवनेश्वर कुमार9.214504.82333537.14
मोहम्मद शमी10.008138.1274828.1
आर. अश्विन10.004224.2759734.33
स्टुअर्ट बिनी4.002205.5200
रवींद्र जडेजा10.01303139911632.92
अंबाती रायडू1.00909800
रोहित शर्मा5.002905.8121860.38
भारत टीम:
दिनेश कार्तिक, रोहित शर्मा, विराट कोहली, भुवनेश्वर कुमार, आर. अश्विन, शिखर धवन, मोहम्मद शमी , अंबाती रायडू, स्टुअर्ट बिनी, रवींद्र जडेजा, अजिंक्य रहाणे
* अभी सारी जानकारी हिंदी में उपलब्ध नहीं है। जल्द ही हम सारी जानकारी हिंदी में देने का प्रयास करेंगे।
Abbreviations : ( R - रन, B -बॉल, 4s -चौके, 6s -छक्के, S/R -स्ट्राइक रेट, nb -नो बॉल, wb -वाइड बॉल, LB -लेग बाई, O -ओवर, M -मेडन, W -विकेट, E/R -इकॉनमी रेट)
content Divider

बैट्समनस्टेटसRB4's6'sSRMatRAvg
रोहित शर्माएलबीडब्ल्यू सचित्रा सेनानायके13281046.43121336231.72
शिखर धवनबोल्ड अजांता मेंडिस941147182.4636143440.97
विराट कोहली (C)बोल्ड अजांता मेंडिस48514194.12131562945.76
अजिंक्य रहाणेकॉट लाहिरू थिरीमाने बोल्ड सचित्रा सेनानायके22271081.482560825.33
अंबाती रायडूकॉट कुशल परेरा बोल्ड Chathuranga de Silva18231078.26818530.83
दिनेश कार्तिक (W)कॉट Chathuranga de Silva बोल्ड अजांता मेंडिस4310133.3370129124.36
रवींद्र जडेजानॉट आउट22270181.4899148922.91
स्टुअर्ट बिनीएलबीडब्ल्यू सचित्रा सेनानायके04000200
आर. अश्विनबोल्ड लसिथ मलिंगा181620112.57553612.47
भुवनेश्वर कुमारस्टंप कुमार संगकारा बोल्ड अजांता मेंडिस00000331358.44
मोहम्मद शमीनॉट आउट1470220027534.82
कुल स्कोर: 264/9 (50.0)
अतिरिक्त: 11 ( नो बॉल-0, वाइड-6, लेग बाइ-1, बाइ- 4, पेनल्टी-0)रन रेट: 5.28
विकेट गिरे :
1/33 (रोहित शर्मा, 9.2 ov.), 2/130 (विराट कोहली, 26.3 ov.), 3/175 (अजिंक्य रहाणे, 35.1 ov.), 4/196 (शिखर धवन, 39.3 ov.), 5/200 (दिनेश कार्तिक, 40.0 ov.), 6/214 (अंबाती रायडू, 42.3 ov.), 7/215 (स्टुअर्ट बिनी, 43.3 ov.), 8/245 (आर. अश्विन, 48.0 ov.), 9/247 (भुवनेश्वर कुमार, 48.2 ov.)
बॉलिंग
 करियर
बोलरOMRWNBWBE/RMatWAvg
लसिथ मलिंगा10.0058115.816425127.09
एंजेलो मैथ्यूज3.21902.71167335.33
सचित्रा सेनानायके10.004134.1262736.59
तिसारा परेरा6.404006698927.88
अजांता मेंडिस10.00604466611620.82
Chathuranga de Silva10.0051115.12253.5
श्रीलंका टीम:
महेला जयवर्द्धने, कुमार संगकारा, लसिथ मलिंगा, अजांता मेंडिस, एंजेलो मैथ्यूज, तिसारा परेरा, लाहिरू थिरीमाने, दिनेश चंडीमल, सचित्रा सेनानायके, Chathuranga de Silva, कुशल परेरा
* अभी सारी जानकारी हिंदी में उपलब्ध नहीं है। जल्द ही हम सारी जानकारी हिंदी में देने का प्रयास करेंगे।

Wednesday, 26 February 2014

विधायकों को टिकट नहीं देगी 'आप', केजरीवाल नहीं लड़ेंगे चुनाव?


पूनम पाण्डे, नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के अपने विधायकों को लोकसभा के लिए टिकट न देने का फैसला किया है। पार्टी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि जो लोग दिल्ली में विधायक हैं, उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलेगा। इसके तहत अब मंगोलपुरी से पार्टी की विधायक राखी बिड़लान को टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी के इस नए फरमान ने अरविंद केजरीवाल के चुनाव लड़ने पर सवालिया निशान लगा दिया है, लेकिन केजरीवाल के बारे में पार्टी ने अभी सीधे तौर पर कुछ भी नहीं कहा है। वह नई दिल्ली सीट से विधायक हैं।

ब्लॉग पढ़ें: बेदर्दी केजरी तुझको ये दिल्ली याद करती है!

सस्पेंडेड असेंबली वजह: केजरीवाल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह विधायकों को टिकट नहीं देंगे। सूत्रों ने बताया कि अभी दिल्ली असेंबली सस्पेंडेड हैं और पार्टी विधायकों को टिकट देकर बीजेपी का दिल्ली में सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं करना चाहती। हालांकि, यह तभी होगा जब वे विधायक चुनाव जीतेंगे। सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने तीन विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है, लेकिन सस्पेंडेड असेंबली की वजह से दुविधा में है।

तस्वीरों में: लोकसभा चुनाव में AAP के 10 महारथी

लिहाजा पार्टी बार-बार असेंबली डिजॉल्व करने की मांग कर रही है। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। यदि असेंबली डिजॉल्व हो गई तो फिर मौजूदा विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़वाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

अरविंद का ऑप्शन खुला: विधायकों को चुनाव न लड़ाने के फैसले का असर वैसे तो केजरीवाल पर भी लागू होगा, लेकिन पार्टी की पीएसी फैसला पलट सकती है। यह टॉप मोस्ट बॉडी है, जिसका फैसला आखिरी होता है। पार्टी प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि विधायकों को चुनाव नहीं लड़ने देने के मामले में पार्टी के भीतर कॉमन अंडरस्टैंडिंग है। लेकिन, क्या अरविंद भी चुनाव नहीं लड़ेंगे? इस पर दिलीप ने कहा कि कौन चुनाव लड़ेगा या नहीं इसका फैसला पीएसी करती है।

दूसरी तरफ, केजरीवाल के विधायकों को चुनाव नहीं लड़ाने के ऐलान के बाद पार्टी ऑफिस के बाहर बैठे कार्यकर्ताओं ने अनशन खत्म कर दिया। गोपाल राय ने जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया, जो विधायक राखी बिड़लान को कैंडिडेट बनाने का विरोध कर रहे थे।

फिलहाल जिन सीटों पर आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें कोई विधायक नहीं है। चांदनी चौक सीट से पार्टी ने आशुतोष को उतारने का फैसला किया है।

आम चुनाव में सब पर भारी पड़ेंगे मोदी?

क्या नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी सचमुच भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं? क्या उनकी तकदीर में है यह योग? वो कौन से सितारे हैं जो उन्हें समाज के निचले स्तर से उठाकर आम से खास बनाते हैं? क्या उनके योग औरों से बेहतर हैं? क्या वह इसके काबिल हैं? आइए ताकाझांकी करते हैं उनकी कुंडली में। प्रस्तुत है आध्यात्मिक व ज्योतिषीय चिंतक आनंद जौहरी का विश्लेषण...

नरेंद्र दामोदर दास मोदी, इस नाम ने सिर्फ अपने दम पर कांग्रेस पार्टी की पेशानी पर बल डाल रखा है। भारतीय जनता पार्टी का यह इक्का अपनी तुरुप की चाल से कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेदता प्रतीत हो रहा है, पर क्या मोदी जी इस करिश्मे को अंजाम तक पहुंचा पाएंगे? क्या यह रणनीतिकार राहुल गांधी के स्वप्न को ध्वस्त कर पाएगा? क्या यह खिलाड़ी आम आदमी के दर्द को आम आदमी पार्टी का वोट बनने से रोक सकेगा? आइए देखते हैं ग्रहों की चाल और करते हैं इन सवालों की पड़ताल नरेंद्र मोदी की कुंडली में।

श्री मूल चंद मोदी के पौत्र और हीराबेन तथा दामोदर दास मोदी के पुत्र नरेंद्र मोदी का जन्म 1950 के सितंबर माह की 17वीं तारीख को दापहर 12 बजे के आसपास मेहसाणा, गुजरात के वडनगर नामक छोटे से स्थान में हुआ था। यदि उनका यह जन्म विवरण सही है तो भारतीय जनता पार्टी के इस नए व्यूह के रचनाकार की राशि और लग्न दोनों ही वृश्चिक हैं।

63 फीसदी भारतीय बीजेपी के पक्ष में: अमेरिकी सर्वे

वाशिंगटन: अमेरिका में किए गए एक सर्वे में कहा गया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में करीब 63 फीसदी भारतीय वोटर विपक्षी दल बीजेपी के पक्ष में हैं, जबकि सिर्फ 20 फीसदी से भी कम लोग सत्तारुढ़ कांग्रेस के पक्ष में हैं। साथ ही सर्वे में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री पद के लिए बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कांग्रेस के उम्मीदवार राहुल गांधी से कहीं अधिक लोकप्रिय हैं।

पीईडब्ल्यू रिसर्च ने कहा है, 'भारतीय संसदीय चुनाव कुछ ही सप्ताह दूर बचे हैं। कांग्रेस के विपरीत करीब 63 फीसदी मतदाता हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी यानी विपक्षी दल बीजेपी को अगली सरकार की कमान थमाना चाहते हैं।'

इस सर्वे में यह कहा गया है कि 63 फीसदी वोटर बीजेपी के पक्ष में और 19 फीसदी कांग्रेस के पक्ष में, लेकिन दोनों पार्टियों को मिलने वाली सीटों के बारे में इस सर्वे में कुछ नहीं कहा गया है।

यह सर्वे 7 दिसंबर 2013 से 12 जनवरी 2014 के बीच किया गया है और इसमें विभिन्न राज्यों में जाकर 2464 लोगों से आमने-सामने बात की गई। सर्वे के अनुसार, केवल 29 फीसदी भारतीय देश के आज के हालात से संतुष्ट हैं, जबकि 70 फीसदी लोगों में असंतोष है।

इसमें बताया गया है कि अन्य दलों को केवल 12 फीसदी जनता का समर्थन हासिल है। सर्वे में बीजेपी को ग्रामीण इलाकों में 64 फीसदी और शहरी इलाकों में 60 फीसदी समर्थन हासिल होने की बात कही गई है।

जगदंबिका पाल थामेंगे बीजेपी का दामन?


लखनऊ
अगर सबकुछ ठीक रहा तो वह लखनऊ में 2 मार्च को होने वाली नरेंद्र मोदी की रैली के मंच पर नजर आएंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डुमरियगंज के कांग्रेस सांसद और पूर्वांचल में पार्टी का सबसे चर्चित चेहरा माने जाने वाले जगदंबिका पाल बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। हालांकि, इस बात की कोई पुख्ता पुष्टि करने को तैयार नहीं है। जगदंबिका पाल ने कांग्रेस में अपमानित होने की बात मानी है, लेकिन बीजेपी में जाने की चर्चाओं के सवाल पर वह गोलमाल जवाब देकर टाल गए।


जगदंबिका पाल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पूर्वांचल से पार्टी के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुके हैं। जगदंबिका पाल सार्वजनिक तौर पर पार्टी नेतृत्व को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने उनका इस्तेमाल किया और बदले में कुछ नहीं मिला। पाल ने कहा, 'प्रदेश की राजनीति में मुझसे छह जूनियर लोग केंद्र में मंत्री हैं। बेनी प्रसाद वर्मा, सलमान खुर्शीद, श्रीप्रकाश जायसवाल भी मुझसे जूनियर हैं। केंद्रीय नेतृत्व मुझे पद दे या नहीं, लेकिन मेरा एक सम्मान तो रहना चाहिए। आखिर मैं सीनियर लीडर हूं।'

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की स्टेट यूनिट जगदंबिका पाल को पार्टी में शामिल किए जाने का विरोध कर रही है। इसलिए हर कदम संभलकर आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद इनको बीजेपी से टिकट मिलना तय हो गया है।

प्रदेश से कांग्रेस के एक और सांसद के भगवा रंग में रंगने की चर्चा है। लखनऊ से सटे जिले से इस सांसद ने कांग्रेस के टिकट पर पिछले चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की थी। एक बड़े औद्योगिक घराने से उनके करीबी रिश्तों की बात कही जाती है। उनको लेकर कहा जा रहा है कि उनकी ख्वाहिश पुराने निर्वाचन क्षेत्र से ही चुनाव लड़ने की है, लेकिन कांग्रेस की हवा उन्हें जीत की गारंटी नहीं दे पा रही है, इस वजह से वह बीजेपी का टिकट पाने की जोड़-तोड़ में हैं। राजनाथ सिंह से उनके भी मुलाकात की बात कही जा रही है।

Friday, 14 February 2014

कांग्रेस विधायक जयकिशन के घर पर पथराव



नई दिल्ली
दिल्ली में शुक्रवार देर रात कांग्रेस विधायक जयकिशन के घर पर अज्ञात लोगों ने पथराव कर दिया। सूत्रों के मुताबिक इससे घर के बाहर खड़ी एक गाड़ी और घर के शीशे टूट गए।

पथराव किसने किया इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। उधर, पुलिस ने इस घटना के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि पथराव की यह घटना शुक्रवार शाम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद हुई।

केजरीवाल की सियासी 'शहादत', एक तीर से कई निशाने

दिलबर गोठी, नई दिल्ली
जन लोकपाल बिल को पेश न कर पाने के कारण अरविंद केजरीवाल 'शहीद' हो गए। उनके सामने दो विकल्प थे- सड़क पर उतरने के लिए विधानसभा में 'शहीद' हो जाएं या फिर विधानसभा में बने रहकर वह जनता से किए गए अपने वादे को पूरा न करने का जोखिम लें। उन्होंने पहला विकल्प चुना।

केजरीवाल ने पहले से ही घोषणा कर दी थी कि अगर वह अपना जन लोकपाल बिल पास नहीं करा पाए, तो इस्तीफा दे देंगे। अब नैतिकता का तकाजा यही था कि वह इस्तीफा दे ही दें। अगर इस मुकाम पर आकर वह इस्तीफा नहीं देते तो जनता में उनकी साख गिरती और किरकिरी होती। इसीलिए वह बार-बार सीएम की कुर्सी कुर्बान करने की बात कह रहे थे। उनकी विश्वसनीयता इसी में थी कि वह कुर्सी कुर्बान कर दें और आखिर उन्होंने यही किया भी।

केजरीवाल ने 49 दिन सरकार चलाई, लेकिन पहले ही दिन से वह जिस जल्दी में थे, उसे देखकर उन्हें अहसास था कि कभी भी इस्तीफा देना पड़ सकता है। इसीलिए उन्होंने बिजली-पानी सस्ता करने, बिजली कंपनियों का ऑडिट कराने और आंदोलन में साथ देने वालों का बिजली बिल माफ कराने के निर्णय बड़ी ही जल्दी में ले लिए। हालांकि, उन्होंने घोषणा की थी कि जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो इस्तीफा दे देंगे, लेकिन शुक्रवार को विधानसभा में जब यह तय हो गया कि बिल पेश नहीं हो पा रहा तो भी उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को आगे चलने दिया और तुरंत इस्तीफे की घोषणा नहीं की। इसका कारण यह था कि बिजली सस्ती करने के बाद बजट में प्रावधान करने का प्रस्ताव उसके बाद ही पेश होना था। उसके बिना 400 यूनिट तक इस्तेमाल करने वालों को बिजली सस्ती नहीं मिल पाती।
केजरीवाल ने अपने 49 दिनों की सरकार के दौरान टाइमिंग का सबसे ज्यादा ध्यान रखा। उन्हें पता था कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही बिल पेश नहीं होने देंगे तो उनकी 'मिलीभगत' का राज खोलने के लिए उन्होंने दो दिन पहले ही मुकेश अंबानी और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। यही वजह है कि जब दोनों ने बिल पेश नहीं होने दिया तो वह अपने आरोप को साबित करने में पीछे नहीं हटे कि अंबानी के खिलाफ एफआईआर कराने के हमारे फैसले के खिलाफ ही दोनों पार्टियां इकट्ठी हो गई हैं।

कांग्रेस ने जब केजरीवाल सरकार को समर्थन दिया था, तभी यह साबित हो गया था कि यह सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। यह बात कांग्रेस भी कह चुकी थी कि समर्थन देने का मतलब केजरीवाल सरकार को फंसाना है और 'आप' के नेता भी यह मान रहे थे कि कब सरकार गिर जाए, कुछ पता नहीं। कांग्रेस ने इसलिए समर्थन दिया कि उसे विश्वास था कि यह सरकार उन वादों को पूरा नहीं कर सकती जो उसने सत्ता में आने के लिए जनता से किए हैं, जबकि 'आप' कांग्रेस को ही फंसाने की कोशिश में लगी हुई थी। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत कांग्रेस के किसी बड़े नेता को वह सीधे तो कटघरे में खड़ा नहीं कर सकी, लेकिन उसने यह जताने की कोशिश अवश्य की कि वह जनता के हित में काम करना चाहती है।

केजरीवाल दोबारा जनता में जाने के लिए किसी ऐसे मुद्दे की तलाश में थे, जिससे यह माना जाए कि वह 'शहीद' हो गए हैं और जन लोकपाल से बड़ा मुद्दा कोई नहीं हो सकता था। इसीलिए वह इसी मुद्दे को आगे लेकर आ गए, ताकि दोबारा जनता के बीच जाकर यह कह सकें कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने मिलकर उनकी सरकार नहीं चलने दी। वह चाहते तो जन लोकपाल बिल को केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेज सकते थे और बाद में यह कह सकते थे कि मैंने तो अपना काम कर दिया, केंद्र ही नहीं चाहता कि दिल्ली में जन लोकपाल बिल पास हो सके। मगर, वह इसी मुद्दे पर टकराव कर बैठे, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इससे जनता में उनके लिए सहानुभूति पैदा होगी और वह 'शहीद' जैसी स्थिति में आ जाएंगे। इसीलिए केवल 49 दिन बाद ही उन्होंने अपनी सरकार की शहादत को मंजूर कर लिया।

एग्जिट प्लान' को बखूबी अंजाम दिया केजरीवाल ने

प्रशांत सोनी, नई दिल्ली
दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को जन लोकपाल बिल का जो हश्र हुआ, उसे देखकर सरकार की मंशा पर भी कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार खुद ही नहीं चाहती थी कि बिल पेश हो।

यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि जब स्पीकर से इजाजत लेकर सीएम केजरीवाल ने सदन में बिल पेश कर दिया था और स्पीकर ने उसे स्वीकार भी कर लिया था, उसके बावजूद सरकार और स्पीकर बिल पर वोटिंग कराने के लिए राजी क्यों हुए, जबकि यह तय था कि अगर वोटिंग हुई तो बिल पेश करने के खिलाफ ही होगी।

केजरीवाल गुरुवार को ही साफ कर चुके थे कि अगर सदन में बिल पेश करने या पास करने को लेकर वोटिंग होती है और फैसला बिल के और सरकार की मंशा के खिलाफ जाता है, तो वह इस्तीफा दे देंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल खुद ही चाहते थे कि बिल को लेकर वोटिंग हो, ताकि उन्हें सरकार से एग्जिट करने का मौका और रास्ता मिल जाए।
मंशा समझनी नहीं थी मुश्किल
अगर कुछ दिनों का घटनाक्रम देखें, तो उससे यह साफ लग रहा था कि केजरीवाल अब ज्यादा दिन सरकार चलाने के मूड में नहीं हैं। पिछले हफ्ते जिस तरह उन्होंने बिल पास न होने की स्थिति में इस्तीफा देने और सरकार के पास महज 48 घंटे होने की बात कही थी, उससे उनकी मंशा समझना मुश्किल नहीं था। बल्कि कांग्रेस, बीजेपी, उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय का बिल को लेकर जो रुख देखने को मिल रहा था, उससे केजरीवाल का काम आसान ही हो रहा था। दो दिन पहले आम आदमी पार्टी की बैठक में भी पार्टी नेताओं ने बिल पेश न होने की सूरत में केजरीवाल को इस्तीफे के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया था।

सुबह से ही बंध गई थी भूमिका
गुरुवार को सत्र के पहले दिन सदन में हुए हंगामे के बाद भी केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि अगर वोटिंग बिल के खिलाफ होती है, तो वह इस्तीफा दे देंगे। शुक्रवार सुबह से ही इसकी भूमिका बंधनी शुरू हो गई थी। मंत्री मनीष सिसोदिया ने सुबह ही ट्वीट किया, 'लोग पूछ रहे हैं - क्या करोगे। एक ही संकल्प - जन लोकपाल पर कोई समझौता नहीं।' मनीष के इस ट्वीट को केजरीवाल ने रीट्वीट भी किया।

दोपहर में जब सदन की कार्यवाही हुई तो अरविंद के माता-पिता, उनकी पत्नी और बेटा भी एलजी दीर्घा में मौजूद थे। उससे भी यह अंदेशा लग रहा था कि कहीं केजरीवाल आज सदन में ही अपने इस्तीफे की घोषणा तो नहीं करने वाले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बिल पेश किया जाए या नहीं, इस पर वोटिंग कराने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी विधायकों द्वारा बनाए जा रहे भारी दबाव के बावजूद केजरीवाल ने स्पीकर की इजाजत से बिल पेश कर दिया। बाद में बाकायदा स्पीकर और खुद सीएम ने इसकी पुष्टि की और कहा कि बिल पेश हो गया है और अब इस पर चर्चा होगी, लेकिन इसके बाद सरकार और स्पीकर के रुख में अचानक बदलाव आया और वे बिल को लेकर वोटिंग कराने पर रजामंद हो गए। हुआ भी वही। और उसके बाद पहले से तय रणनीति के तहत केजरीवाल ने सदन में इस्तीफे के संकेत देते हुए घोषणा कर दी यह उनके लिए सदन का आखिरी सत्र है।

असल में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की नजर अब लोकसभा चुनावों पर है। केजरीवाल पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का भारी दबाव है। खुद केजरीवाल भी साफ कर चुके हैं कि अगर पार्टी कहेगी, तो वो चुनाव जरूर लड़ेंगे। ऐसे में दिल्ली विधानसभा से उनका निकलना जरूरी था और यह तभी संभव होता, जब केजरीवाल इस्तीफा देते। जिस तरह लड़खड़ाते हुए सरकार चल रही थी, उससे भी यही लग रहा था कि केजरीवाल इस तरह से सरकार चलाने के लिए कतई तैयार नहीं हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यही लग रहा है कि केजरीवाल अपने एग्जिट प्लान को बखूबी अंजाम देने में कामयाब रहे।